इस जहर के शिकार मरीजों की अगर जान बच भी जाए, फिर भी स्थाई तौर पर उसके नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है. इस जहर को और भी खतरनाक बनाने वाली बात यह है कि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिसकी वजह से अक्सर इसकी पहचान ही नहीं हो पाती.
इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि दिल्ली-NCR, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास की मिट्टी में काफी ज्यादा मात्रा में लेड यानी सीसा पाया गया है. इसके कारण इस पूरे आसपास क्षेत्र की मिट्टी प्रदूषित हो गई है. पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था टॉक्सिक्स लिंक ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है. इस संस्था का कहना है कि बैटरी रीसाइक्लिंग के कारण इस पूरे इलाके में सीसा की मात्रा ज्यादा हो गई है.
इस रिपोर्ट में अधिकृत (केंद्रीय या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के जरिए सूचीबद्ध) और अनधिकृत (अनौपचारिक) लेड-एसिड बैटरी रिसाइक्लिंग करने वाली कंपनियों के पास से एकत्र किए गए 23 तरह की मिट्टी के नमूनों में प्रदूषण का जांच किया गया. ये नमूने आवासीय क्षेत्रों, स्थानीय समुदायों और प्राथमिक विद्यालयों के निकट स्थित स्थानों से लिए गए थे.




