3 मई 2026 को भारत भर में 22 लाख से अधिक स्टूडेंट्स उस परीक्षा में शामिल हुए, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि वह उनकी मेहनत ज़िंदगी बदल देगी.नौ दिन बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनसीटी) ने पहली बार मेडिकल कोर्सों में दाख़िले के लिए प्रवेश होने वाली नीट (यूजी) की पूरी परीक्षा रद्द कर दी.

दोबारा परीक्षा की नई तारीख़ों की अभी घोषणा अभी नहीं की गई है, जिससे स्टूडेंट्स और पैरेंट्स में प्रवेश प्रक्रिया में संभावित देरी को लेकर चिंता जताई गई है.मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि एजेंसी को 7 मई को परीक्षा के चार दिन बाद, एक व्हिसलब्लोअर से जानकारी मिली थी कि एक 'गेस पेपर' का पीडीएफ़ व्हाट्सऐप पर सर्कुलेट किया गया था, जिसमें वास्तविक नीट परीक्षा जैसे ही प्रश्न थे.

अभिषेक सिंह ने कहा, "परीक्षा में किसी भी तरह का उल्लंघन करने पर हमारी ज़ीरो-टॉलरेंस नीति के ख़िलाफ़ है और इससे उन 22 लाख छात्रों के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है जो छात्रों ने इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की थी."

नीट-यूजी भारत की एकमात्र एकीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जो देशभर में आयोजित स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश तय करती है.पहले होने वाली कई राज्य-स्तरीय मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की जगह इस मानकीकृत परीक्षा ने ले ली थी, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मान्य है.

लेकिन कथित पेपर लीक ने एक बार फिर बड़े पैमाने की परीक्षाएं निष्पक्ष और सुचारु रूप से कराने की एनटीए की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.परीक्षा रद्द होने के एक दिन बाद, फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत की निगरानी में परीक्षा दोबारा कराने और एनटीए को बदलने या उसके बुनियादी पुनर्गठन की मांग की.

साल 2024 में भी यह परीक्षा रद्द पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स देने में अनियमितताओं के आरोपों में घिरी थी , जिसके कारण हज़ारों अभ्यर्थियों को असामान्य रूप से अधिक नंबर मिलने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप लगने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। जांच में सामने आया कि कोचिंग सेंटर्स, टेलीग्राम ग्रुप्स और राजस्थान-झारखंड जैसे राज्यों में परीक्षा केंद्र की सुरक्षा में सेंध लगाकर पेपर पहले ही वायरल किया गया था, जिसे CBI को सौंप दिया गया है।

नीट परीक्षा के आयोजन में मुख्य खामियां:

असुरक्षित प्रश्नपत्र श्रृंखला: परीक्षा पेपर के भौतिक परिवहन (physical transport) के दौरान सुरक्षा में कमी होने से लीक की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

सेंटर सुपरिटेंडेंट की मिलीभगत: पेपर जांच में पाया गया कि केंद्र के प्रमुख (जैसे हजारीबाग में) ही मजबूत कमरे (strong room) की खिड़की या दरवाजा खुला छोड़कर प्रश्नपत्र के फोटो लेने की अनुमति दे देते हैं।

टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग: टेलीग्राम और व्हाट्सएप का उपयोग करके परीक्षा से कुछ समय पहले प्रश्नपत्र सॉल्वर्स (हल करने वालों) तक पहुँचाया जाता है।

निजी कोचिंग इकोसिस्टम: कोचिंग माफिया और सॉल्वर गैंग की मिलीभगत, जो मोटी रकम लेकर छात्रों को पहले ही प्रश्नपत्र मुहैया कराती है।

पेपर लीक कहाँ हो सकता है?

परीक्षा केंद्र के मजबूत कमरे (स्ट्रॉंग रूम ): जहां प्रश्नपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं।

छापेमारी और फोटो खींचना: हजारीबाग और पटना जैसी जगहों पर, जहां परीक्षा से एक दिन पहले या सुबह पेपर के फोटो लिए गए।

प्रिंटिंग प्रेस या परिवहन: प्रश्नपत्र प्रिंट होने से लेकर केंद्र तक पहुँचने के दौरान।

इन खामियों के चलते नीट -युग 2026 के हजारों अभ्यर्थियों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और परीक्षा रद्द होने के कारण अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।