ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा ने अपनी मृत बहन के खाते से ₹19,300 निकालने के लिए बैंक अधिकारियों द्वारा बार-बार मना किए जाने के बाद उसकी हड्डियों के अवशेष (कंकाल) बैंक (Odisha Gramya Bank) में लाने जैसा कठोर कदम उठाया। यह एक अत्यंत गरीब आदिवासी का मामला है जो बिना आवश्यक दस्तावेजों (मृत्यु प्रमाण पत्र) के बहन के पैसे निकालने का प्रयास कर रहा था, जिसे बैंक ने अस्वीकार कर दिया था।
घटनास्थल: ओडिशा, क्योंझर जिला।
मामला: जीतू मुंडा की बहन की जनवरी 2026 में मृत्यु हो गई थी। वह उसकी मेहनत की कमाई (लगभग ₹19,300-₹20,000) निकालना चाहता था।
बैंक की प्रतिक्रिया: बैंक अधिकारियों ने मृत व्यक्ति की उपस्थिति या मृत्यु प्रमाण पत्र की कमी के कारण पैसे देने से मना कर दिया था।
कठोर कदम: लाचार होकर, जीतू ने अपनी बहन की हड्डियों को कब्र से निकाला और 3 किमी पैदल चलकर बैंक पहुंचा ताकि मौत का सबूत दे सके।
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वायरल वीडियो: घटना का वीडियो वायरल होने के बाद, प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
वित्तीय सहायता: रेड क्रॉस ने जीतू मुंडा को ₹20,000 की सहायता राशि दी है।
निजी सहायता: फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे ने जीतू को 10 लाख रुपये की सहायता प्रदान की है।
बैंक का रुख: बैंक कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगने के बाद जांच शुरू हुई है।
यह घटना देश में बैंकिंग प्रणाली में कागजी कार्रवाई की जटिलता और ग्रामीण गरीबों को हो रही कठिनाइयों के प्रति संवेदनशीलता
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